Saturday, 4 June 2016

प्रधानमंत्री की अफगानिस्तान, कतर, स्विट्जरलैंड, अमेरिका और मेक्सिको की आगामी यात्रा


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 4 जून 2016 से 8 जून 2016 तक अफगानिस्तान, कतर, स्विट्जरलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका और मैक्सिको की यात्रा पर जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने फेसबुक पर अपनी कई पोस्‍टों में कहा :

"मैं कल से शुरू होने वाली अपनी अफगानिस्तान यात्रा को लेकर बहुत उत्‍सुक हूं। कल मैं और राष्ट्रपति अशरफ गनी हेरात में अफगानिस्तान-भारत मैत्री बांध का उद्घाटन करेंगे। यह बांध हमारी मैत्री का प्रतीक है और हमारा उम्‍मीदों को आगे बढ़ाने के अलावा घरों को रोशन करेगा, हेरात के उपजाऊ खेतों को हरा-भरा करेगा और इस क्षेत्र के लोगों के लिए समृद्धि लाएगा।

मैं अपने दोस्त राष्ट्रपति अशरफ गनी से मिलने और आने वाले समय में द्विपक्षीय सहयोग के लिए क्षेत्रीय स्थिति और एजेंडा तय करने के बारे में विचारों के आदान-प्रदान के लिए उत्‍सुक हूं।

मैं 4 और 5 जून को महामहिम अमीर ऑफ कतर के निमंत्रण पर कतर का दौरा करूंगा।

मैं महामहिम शेख तमीम से मुलाकात के लिए भी उत्‍सुक हूं, जिनकी पिछले साल की गई भारत की ऐतिहासिक यात्रा ने हमारे संबंधों को नए आयाम दिए हैं।

मुझे फादर अमीर से मिलने का भी सम्‍मान हासिल होगा, जिन्‍होंने वयक्तिगत रूप से पिछले दो दशकों से हमारे संबंधों का मार्गदर्शन किया है।

यह यात्रा हमारी मित्रता के ऐतिहासिक बंधन में प्रगाढ़ता लाएगी जिसकी जड़ें लोगों के आपसी संपर्कों, ऊर्जा, व्यापार और निवेश भागीदारी में नि‍हित हैं।

मैं श्रमिक शिविर में भारतीय कामगारों से और कुछ सदस्यों से भी बातचीत करूंगा, वहां 6 लाख से ज्यादा भारतीय अपने पसीने और मेहनत से हमारे आपसी संबंधों को पाल-पोस रहे हैं। व्यापार और निवेश सहयोग की पूरी क्षमताओं को इस्‍तेमाल करने के लिए मैं वहां कतर के व्‍यापार जगत के दिग्‍गजों से भी बातचीत करूंगा।

यूरोप में हमारे प्रमुख भागीदार स्विट्जरलैंड में द्विपक्षीय यात्रा पर मैं 5 जून की शाम को जिनेवा पहुंच जाऊंगा। हमारे द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को प्रगाढ़ बनाने के लिए मैं राष्ट्रपति श्नाइडर-एम्‍मान के साथ भी बातचीत करूंगा।

जिनेवा में, मैं प्रमुख कारोबारियों से मुलाकात करूंगा। आर्थिक और निवेश संबंधों का विस्तार देना हमारा एजेंडा होगा। मैं सीईआरएन में काम कर रहे भारतीय वैज्ञानिकों से मुलाकात करूंगा। मानवता की सेवा में विज्ञान की नई क्षेत्रों की खोज में उनके योगदान पर भारत को गर्व है।

मैं राष्‍ट्रपति बराक ओबामा के निमंत्रण पर द्विपक्षीय यात्रा पर 6 जून की शाम को वाशिंगटन डीसी पहुंच जाऊंगा।

7 जून को राष्‍ट्रपति के साथ अपनी बैठक में, हम विभिन्‍न क्षेत्रों में अपनी सामरिक भागीदारी में नए जोश और गति उपलब्‍ध कराने में अर्जित प्रगति को बनाए रखने के बारे में बातचीत करेंगे। मैं यूएसआईबीसी की 40वीं एजीएम को संबोधित करूंगा और अमेरिकी व्‍यापार जगत के दिग्‍गजों से मुलाकात करूंगा, जिन्‍होंने पिछले दो वर्षों के दौरान भारत में नया विश्‍वास दिखाया है।

मैं अमेरिकी विचारकों के साथ अपने विचारों का आदान-प्रदान करूंगा और भारतीय प्राचीन वस्तुओं की वापसी के संबंध में आयोजित समारोह में भाग लूंगा।

आर्लिंग्टन कब्रिस्तान की अपनी यात्रा के दौरान मैं अज्ञात सैनिक के मकबरे पर और अंतरिक्ष शटल कोलंबिया मेमोरियल पर, जिसमें हमने भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला को खो दिया है, पर पुष्‍पांजलि अर्पित करूंगा।

8 जून को मैं अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्‍त बैठक को संबोधित करूंगा। कांग्रेसजनों और सीनेटरों के बीच अपनी बात रखने के लिए आमंत्रण हेतु मैं अध्यक्ष पॉल रयान का धन्यवाद देता हूं।

अमेरिकी की राजधानी की अपनी यात्रा के दौरान में हाउस ऑफ रिप्रेजें‍टेटिव्‍ज और सीनेट के सदस्‍यों के साथ बातचीत करूंगा, अधिकांश सदस्‍य भारत के महत्‍वपूर्ण मित्र हैं और भारत-अमेरिका संबंधों की प्रगाढ़ता के मजबूत पैरोकार हैं।

भारत और अमेरिका स्वाभाविक भागीदार हैं, दो जीवंत लोकतंत्र हैं जो अपनी विविधता और बहुलवाद का जश्न मनाने कर रहे हैं। भारत-अमेरिका के मजबूत संबंधों से न केवल हमारे दोनों देशों को लाभ होगा, बल्कि इससे पूरी दुनिया को भी फायदा होगा। मैं लैटिन अमेरिकी क्षेत्र में विशेषाधिकार प्राप्त भागीदार मेक्सिको की अपनी यात्रा के दौरान 8 जून को राष्ट्रपति पेना नीटो से मिलने के लिए उत्‍सुक हूं। राष्ट्रपति पेना नीटो ने दूरगामी सुधारों की शुरुआत की है। मैं अपने अनुभवों को साझा करने के लिए उत्‍सुक हूं। यह 30 वर्षों के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की मैक्सिको की पहली द्विपक्षीय यात्रा है। हालांकि यह यात्रा छोटी है, लेकिन इसका एजेंडा बहुत महत्‍वपूर्ण हैं जो हमारी भागीदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।"

डब्ल्यूएपीसीओएस ने अफगानिस्तान में ऐतिहासिक आधारभूत परियोजना पूरी की


अफगानिस्तान में अफगान-भारत मैत्री बांध (सलमा बांध) का निष्पादन और कार्यान्वयन भारत सरकार के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के अधीन उपक्रम डब्ल्यूएपीसीओएस लिमिटेड ने किया है। अफगान-भारत मैत्री बांध एक बहुउद्देशीय परियोजना है जिसका मकसद अफगानिस्तान के लोगों के लिए 42 मेगावाट क्षमता का बिजली उत्पादन, 75000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई, जल आपूर्ति और अन्य लाभ उपलब्ध कराना है। भारत सरकार द्वारा अफगानिस्तान के हेरात प्रांत में चिश्ते-ए-शरीफ नदी पर कराया जा रहा सलमा बांध का निर्माण अफगानिस्तान के लिए बुनियादी ढांचा साबित होगी।

यह परियोजना हेरात शहर से 165 किलोमीटर पूर्व में स्थित है जो कच्ची सड़क से जुड़ा हुआ है। सुरक्षा कारणों की वजह से इस परियोजना से जुड़े सभी भारतीय इंजीनियरों और तकनीशियनों का दल अफगानिस्तान सरकार द्वारा प्रदान किए गए हेलीकॉप्टर से महीने में एक बार साइट पर पहुंचाया जाता है।भारत सभी उपकरण और सामग्री समुद्र मार्ग से ईरान के बांदर-ए-अब्बास बंदरगाह तक भेजा गया जिसके बाद 1200 किलोमीटर सड़क मार्ग से ईरान-अफगानिस्तान सीमा पर स्थित इस्लाम किला सीमा चौकी ले जाया गया और फिर सीमा चौकी से आगे 300 किलोमाटर कार्यस्थल पर पहुंचाया गया।अफगानिस्तान ने सीमेंट, इस्पात, विस्फोटक आदि सामग्री पड़ोसी देशों से आयात किया है।बांध की सकल क्षमता 633 मिलियन मीट्रिक टन है, बांध की ऊंचाई 104.3 मीट्रिक टन, लंबाई 540 मीट्रिक टन और सतह की चौड़ाई 450 मीट्रिक टन है।

यह परियोजना भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित है। यह परियोजना बहुत कठिन परिस्थितियों में 1500 भारतीय और अफगानी इंजीनियरों और अन्य पेशेवरों द्वारा कई वर्षों की कड़ी मेहनत का परिणाम है। 

डॉ. थॉमस मैथ्‍यू राष्‍ट्रपति के अपर सचिव नियुक्‍त


भारतीय प्रशासनिक सेवा (केरल:1983) के अधिकारी डॉ. थॉमस मैथ्‍यू को राष्‍ट्रपति का अपर सचिव नियुक्‍त किया गया है। डॉ. थॉमस मैथ्‍यू की यह नियुक्ति 31 मई, 2016 को उनके सेवानिवृत्‍त होने पर की गई है। डॉ. मैथ्‍यू की नियुक्ति अनुबंध के आधार पर 1 जून, 2016 के पूर्वाहन से भारत के राष्‍ट्रपति के कार्यकाल अर्थात 24 जुलाई, 2017 अथवा अगले आदेशों, इनमें से जो भी पहले हो, की अवधि तक प्रभावी होगी। 

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में राष्‍ट्रीय कौशल विकास के संचालन मिशन की संचालन समिति की पहली बैठक

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में राष्‍ट्रीय कौशल विकास मिशन की संचालन समिति की पहली बैठक 2 जून को संपन्‍न हुई।

इस बैठक में प्रधानमंत्री ने भविष्‍य की आवश्‍यकता को देखते हुए हर क्षेत्र में कौशल विकास के महत्‍व पर बल दिया। उन्‍होंने जोर दिया कि स्‍कूल जाने वाले बच्‍चे और उनके माता-पिता यह जान सके कि रोजगार के लिए भविष्‍य की आवश्‍यकताएं क्‍या हैं। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि वैश्विक स्‍तर पर कौशल‍ विकास की क्‍या आवश्‍यकताएं हैं, उनको पूरा करने के लिए भारत की भूमिका भी महत्‍वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि कौशल विकास से जुड़े सभी सुरक्षा मानकों पर ध्‍यान रखा जाए। यह कौशल विकास का अभिन्‍न अंग है।

संचालन परिषद की बैठक में महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री, अरूणाचल प्रदेश, जम्‍मू–कश्‍मीर के मुख्‍यमंत्री कौशल विकास व उद्यमिता राज्‍यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्रीराजीव प्रताप रूड़ी, मानव संसाधन विकास मंत्री श्रीमती स्‍मृति जुबिन ईरानी, संचार व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री रवि शंकर प्रसाद, सूक्ष्‍म एवं लघु एवं मझौले उद्यम मंत्री श्रीकलराज मिश्र शामिल हुए। इसके अलावा इस बैठक में वरिष्‍ठ नौकरशाह व टाटा ग्रुप के अध्‍यक्ष सायरस पी मिस्री, फिल्‍पकार्ट के संस्‍थापन और सीईओ सचिन बंसल तथा टीम लीस सर्विसज के अध्‍यक्ष व संस्‍थापक मनीष सभरवाल भी शामिल हुए।

बैठक में लिए गए निर्णय इस प्रकार हैं:-

• वर्ष 2016-17 में डेढ़ करोड़ लोगों को कौशल विकास का प्रशिक्षण देने का लक्ष्‍य

• भारत के कौशल विकास के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए सितंबर 2016 तक कौशल प्रमाणीकरण केंद्रीय बोर्ड की स्‍थापना करना ।

• वर्तमान इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रयोग नहीं की गई मूलभूत संरचनाओं को कौशल विकास के लिए उपयोग करने का लक्ष्य।

• सार्वजनिक क्षेत्र की इकाईयों में कुल मानव संसाधन का दस प्रतिशत अप्रेंटिसशिप के लिए आवश्यक करना। निजी क्षेत्र में भी ऐसा करने का प्रावधान किया जाएगा।

• इस वर्ष भारत के उत्साही युवाओं के नि:शुल्क कौशल विकास प्रशिक्षण के लिए 500 प्रधानमंत्री कौशल विकास केंद्र खोले जाएंगे।

• देश से बाहर जाकर रोजगार करनेवालों के लिए 50 प्रवासी कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना।

• देश भर में फैले आईटीआई, सीटीआई, पीएमकेवीवाई प्रशिक्षण केंद्र,टूलरुम पर 500 रोजगार उत्सव का आयोजन करना।

• 2016-17 में राष्ट्रीय कौशल प्रतियोगिता जिसे ‘भारत कौशल’ का नाम दिया गया है,लॉन्च किया जाएगा। यह एक वार्षिक कार्यक्रम होगा।

• जिन उम्मीदवारों ने आईटीआई कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा किया है, उनके लिए राष्ट्रीय स्तर का दीक्षांत समारोह आयोजित किया जाएगा।

• अगले एक वर्ष में आईटीआई की क्षमता 18.5 लाख से 25 लाख करने का लक्ष्य।साथ ही पांच हजार नए आईटीआई का निर्माण करना।

• विभिन्न कार्यक्रमों के तहत पारंपरिक कौशल विकास की पहचान करना, विकसित करना औपचारिक अप्रेंटिसशिप के माध्यम से उनका प्रचार करना।

पृष्ठभूमि

भारत की 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है। काम करनेवाली उम्र के कामगारों में साल 2025 तक विश्व के पांच में से एक भारतीय होगा। वर्ष 2014 में एनडीए की सरकार बनने के बाद भारत की जनसंख्या को देखते हुए पहली बार कौशल विकास को बढ़ाने के लिए सरकार ने कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय का गठन किया। इस मंत्रालय के तहत कौशल भारत को विशेष महत्व मिला।

एमएसडीई मंत्रालय का पारिस्थितिकी तंत्र अलग-अलग हिस्सों में काम करता है।21 केन्द्रीय मंत्रालय और विभाग लगभग 50 से अधिक कौशल विकास के कार्यक्रम को लागू कर रहे हैं। योजनाओं में परस्पर विरोध, कमजोर निगरानी तंत्र, अलग-अलग आकलन और प्रमाणीकरण प्रणाली और सफलता का सुसंगत दृष्टि के अभाव ने इन प्रयासों के प्रभाव को सीमित कर दिया था। बीते दिनों में राष्ट्रीय कौशल विकास कोऑर्डिनेशन बोर्ड या प्रधानमंत्री कौशल विकास राष्ट्रीय परिषद-2008 के माध्यम से सभी को एक करने प्रयास किया गया, लेकिन निगरानी न रखना, ठीक से क्रियान्वयनन होने से ये अप्रभावी रहे।

एमएसडीई मंत्रालय ने कम समय में बेहतर काम किया है। छह महीने के भीतर कौशल विकास के कार्यक्रम को चला रहे अलग-अलग संगठनों को इस मंत्रालय के आधीन लाया गया।8 महीने के भीतर एमएसडीई ने कौशल विकास और उद्यमिता के लिए राष्ट्रीय नीति का निर्माण किया गया।जिसने भारत में कौशल विकास और उद्यमिता के पारिस्थिति तंत्र को मजबूत किया। साथ ही कौशल प्रशिक्षण के प्रयासों के लिए भारत के पहले राष्ट्रीय विकास मिशन की संरचना तय हुई। 15 जुलाई,2015 को माननीय प्रधानमंत्री ने दोनों नीतियों को लॉन्च किया था।

यह मिशन अखिल भारतीय स्तर पर, कौशल विकास गतिविधियों को एकाग्र करने के लिए समन्वय स्थापित करने, लागू करने और नजर रखने के लिए प्रयास है। यह एक तीन स्तरीय संरचना के साथ केंद्र सरकार और राज्यों के तहत प्रमुख हितधारकों के साथ लाया। इनमें नीति भूमिका, समन्वय भूमिका और मिशन निदेशालय (एक कार्यकारी समिति के साथ) के लिए संचालन समिति के लिए शासी परिषद निष्पादन शामिल है। इस मिशन संचालन शासी परिषद में भारत के माननीय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में किया जाता है, यह और एक 'कुशल भारत' के बारे में उनकी दृष्टि द्वारा निर्देशित है।

‘कौशल भारत’ मिशन ने भारत के व्यावसायिक प्रशिक्षण के पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव करने को प्रेरित किया है। पिछले एक साल के दौरान 1.04 करोड़ से अधिक युवाओं को मिशन के तहत प्रशिक्षित किया गया है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष दर्ज आंकड़ों की तुलना में 36.8% अधिक है। वर्तमान व्यवस्था में, 60% प्रषिक्षण एमएसडीई में जबकि 40% अन्य केन्द्रीय मंत्रालयों के अंतर्गत चल रहे हैं। एमएसडीई की फ्लैगशिप योजना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमसेवीवाई) है, जो माननीय प्रधानमंत्री ने 15 जुलाई, 2015 को शुरू की थी। 20 लाख से अधिक लोगों को उनकी पसंद के प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रशिक्षत किया गया, जिनमें 40 प्रतिशत महिला उम्मीदवार हैं।

एनएसडीएम के चार मूल सिद्धांत हैं, स्पीड, स्केल, मानक और स्थिरता। पहले संचालन परिषद की बैठक में इन मूल सिद्धांतों में से प्रत्येक पर चर्चा की गई। उच्च मानकों को बनाए रखते हुए कौशल विकास प्रशिक्षण में तेजी के लाने के लिए के एक ठोस एजेंडे पर चर्चा करने की मांग की है। 

प्रधानमंत्री अफगान-भारत मैत्री बांध का उद्घाटन करेंगे


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अफगानिस्तान के राष्ट्रपति डॉ अशरफ गनी के साथ मिलकर पश्चिमी अफगानिस्तान के हेरात प्रांत में अफगान-भारत मैत्री बांध (सलमा बांध) का कल उद्घाटन करेंगे। अफगान-भारत मैत्री बांध एक बहुउद्देशीय परियोजना है जिसका मकसद अफगानिस्तान के लोगों के लिए 42 मेगावाट क्षमता का बिजली उत्पादन, 75000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई, जल आपूर्ति और अन्य लाभ उपलब्ध कराना है। भारत सरकार द्वारा अफगानिस्तान के हेरात प्रांत में चिश्ते-ए-शरीफ नदी पर कराया जा रहा सलमा बांध का निर्माण अफगानिस्तान के लिए ऐ बुनियादी ढांचा साबित होगी। इस परियोजना का निष्पादन और कार्यान्वयन भारत सरकार के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के अधीन उपक्रम डब्ल्यूएपीसीओएस लिमिटेड द्वारा कराया जा रहा है।

ये परियोजना हेरात शहर से 165 किलोमीटर पूर्व में स्थित है जो कच्ची सड़क से जुड़ा हुआ है। सुरक्षा कारणों की वजह से इस परियोजना से जुड़े सभी भारतीय इंजीनियरों और तकनीशियनों का दल अफगानिस्तान सरकार द्वारा प्रदान किए गए हेलीकॉप्टर से महीने में एक बार साइट पर पहुंचाया जाता है।भारत सभी उपकरण और सामग्री समुद्र मार्ग से ईरान के बांदर-ए-अब्बास बंदरगाह तक भेजा गया जिसके बाद 1200 किलोमीटर सड़क मार्ग से ईरान-अफगानिस्तान सीमा पर स्थित इस्लाम किला सीमा चौकी ले जाया गया और फिर सीमा चौकी से आगे 300 किलोमाटर कार्यस्थल पर पहुंचाया गया।अफगानिस्तान ने सीमेंट, इस्पात, विस्फोटक आदि सामग्री पड़ोसी देशों से आयात किया है।बांध की सकल क्षमता 633 मिलियन मीट्रिक टन है, बांध की ऊंचाई 104.3 मीट्रिक टन, लंबाई 540 मीट्रिक टन और सतह की चौड़ाई 450 मीट्रिक टन है।

यह परियोजना भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित है। यह परियोजना बहुत कठिन परिस्थितियों में 1500 भारतीय और अफगानी इंजीनियरों और अन्य पेशेवरों द्वारा कई वर्षों की कड़ी मेहनत का परिणाम है। 

Thursday, 2 June 2016

सार्वजनिक सूचना

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